Monday, May 27, 2024
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longest Sea Bridge in India: लहरों पर राज करते, भारत के 4 सबसे लंबे समुद्री पुल

longest sea bridge in India: इंजीनियरिंग का कमाल, प्रकृति का संगीत; भारत के चार अनोखे समुद्री पुल

1.राष्ट्र का गौरव, longest sea bridge in India: Mumbai Trans Harbor लिंक, Atal Setu

Mumbai Trans Harbor Link मुंबई भारत का सबसे बड़ा और सबसे व्यस्त महानगर है, जो लगातार बढ़ती आबादी और यातायात के दबाव के साथ संघर्ष कर रहा है। इस बढ़ते दबाव को कम करने और बेहतर कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए, मुंबई ट्रांस हार्बर लिंक (एमटीएचएल) का निर्माण किया जा रहा है।

एमटीएचएल मुंबई को नवी मुंबई से जोड़ने वाला 21.8 किलोमीटर लंबा सड़क पुल है। यह पूरा होने पर भारत का सबसे लंबा समुद्री पुल बन जाएगा, जिससे दक्षिण मुंबई और नवी मुंबई के बीच यात्रा समय में काफी कमी आएगी। इसका उद्घाटन 12 Jan 2024 को देश के प्रधान मंत्री आदरणीय श्री नरेंद्र मोदी जी करेगें।

Mumbai Trans Harbour Link
Mumbai Trans Harbor Link

Atal Setu: विस्तृत जानकारी (Mumbai Trans Harbor Link):

Mumbai Trans Harbor Link (एमटीएचएल) मुंबई को नवी मुंबई से जोड़ने वाला 21.8 किलोमीटर लंबा सड़क पुल है। यह पुल दक्षिण मुंबई के सेवरी से शुरू होकर, हाथी द्वीप के उत्तर में ठाणे क्रीक से होकर गुजरता है, और न्हावा शेवा के पास चिरले गांव में खत्म होता है। इसे Atal Setu भी कहा जाता है ।

इसे बेहतर कनेक्टिविटी के लिए डिज़ाइन किया गया, एमटीएहएल ब्रिज प्रस्तावित नवी मुंबई अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे, जेएनपीटी पोर्ट, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और मुंबई-गोवा राजमार्ग तक त्वरित पहुंच की सुविधा देता है। मुंबई की ओर, यह सेवरी वर्ली एलिवेटेड कनेक्टर परियोजना के माध्यम से तटीय सड़क के साथ जुड़ता है।

Atal Setu  21.8 किमी में फैले, 16.50 किमी के समुद्री विस्तार और 5.5 किमी के भूमि भाग के साथ, पुल में दोनों तरफ एक अतिरिक्त आपातकालीन लेन के साथ 6-लेन राजमार्ग है। 90 मीटर से 180 मीटर के सात ऑर्थोट्रोपिक स्टील डेक स्पैन का उपयोग करते हुए, भारत में पहली बार, इस परियोजना में प्रमुख बिंदुओं पर इंटरचेंज शामिल हैं। इसे अटल ब्रिज के नाम से भी जाना जाता है । यह वर्ल्ड़ का 12th largest ब्रिज है ।

longest sea bridge in India : एमटीएहएल परियोजना नवीन निर्माण विधियों को शामिल कर रही है, जिसमें ऑर्थोट्रोपिक स्टील डेक इरेक्शन और कंक्रीट सुपरस्ट्रक्चर स्पैन का 100 प्रतिशत पूरा होना शामिल है। ₹17,843 करोड़ के बजट के तहत प्रशासित लागत वाली इस परियोजना को तीन सिविल कार्य पैकेजों में बांटा गया है, जिसमें पैकेज 4 इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस), ऑटोमेटिक टोल संग्रह और इलेक्ट्रिकल वर्क्स पर केंद्रित है।

Mumbai Trans Harbor लिंक (एमटीएचएल) की प्रमुख विशेषताएं:

  • 21.8 किलोमीटर लंबाई
  • 6-लेन राजमार्ग
  • 16.50 किलोमीटर समुद्री विस्तार
  • 5.5 किलोमीटर भूमि भाग
  • ₹17,843 करोड़ का बजट
  • 96 प्रतिशत भौतिक प्रगति
  • 91 प्रतिशत वित्तीय प्रगति

Mumbai Trans Harbor Link  (एमटीएचएल) के लाभ:

  • मुंबई और नवी मुंबई के बीच यात्रा समय में कमी
  • आवागमन में सुधार और यातायात का दबाव कम
  • आर्थिक विकास और रोजगार के अवसरों में वृद्धि
  • मुंबई के पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव

एमटीएचएल (Mumbai Trans Harbor Link) का महत्व:

एमटीएचएल सिर्फ एक पुल नहीं है, बल्कि मुंबई के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण परियोजना है। यह पुल मुंबई के परिवहन बुनियादी ढांचे में क्रांतिकारी बदलाव लाएगा और शहर के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

2. भारत का पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज, New Pamban Bridge

new pamban bridge
new pamban bridge (image credit to social media)

New Pamban Bridge: परिचय

भारत का विश्व प्रसिद्ध पमबन ब्रिज अब 114 साल का हो गया है। बीच से दो हिस्सों में खुल कर जहाजों के लिए रास्ता देने वाले इस शानदार और खूबसूरत ब्रिज को रेलवे ने अब रिटायर करने का फैसला कर लिया है। लेकिन उससे पहले पमबन ब्रिज के ठीक बगल में एक नया पमबन ब्रिज बन कर लगभग तैयार है। ये ब्रिज देश का पहला ऐसा ब्रिज होगा जो बीच से ऊपर उठ जाएगा और उसके नीचे से समुद्री जहाज गुजर सकेंगे।

New Pamban Bridge की विशेषताएं:

  • ये देश का पहला वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज है।
  • इसमें बीच का 72.5 मीटर का हिस्सा (स्पैन) अपने दोनों तरफ लगी लिफ्टों के माध्यम से ऊपर की ओर इतना उठ जाएगा कि उसके नीचे से समुद्री जहाज गुजर सकेंगे।
  • ये ब्रिज 2.05 किलोमीटर लंबा होगा।
  • ये ब्रिज मंडपम रेलवे स्टेशन और रामेश्वरम रेलवे स्टेशन के बीच समुद्र के ऊपर बनाया जा रहा है।
  • 560 करोड़ रूपए की लागत से बन रहा ये पुल इसी साल दिसंबर 2022 में बन कर तैयार हो गया।

पुराने पमबन ब्रिज के साथ समस्याएं:

पुराने पमबन ब्रिज का ये स्पेशल स्पैन बीच से दो हिस्सों में फ़्लैप की तरह दो हिस्सों में खुल जाता है जिससे इसके बीच से समुद्री जहाज निकलते रहे हैं। लेकिन मुश्किल ये थी कि इस काम के लिए इसके दोनों तरफ 16-16 व्यक्तियों को खड़े हो कर हाथों से स्ट्रिंग रोलिंग मशीन चलानी पड़ती थी तब कहीं जा कर ब्रिज का स्पैन खुल पाता था। लेकिन अब नए बन रहे वर्टिकल लिफ्ट ब्रिज में ये सारा काम आटोमैटिक लिफ्ट मशीन से होगा जिसमें सिर्फ बटन दबा देने से इसके दोनों ओर लगी लिफ्टें एक साथ ब्रिज के स्पेशल स्पैन को ऊपर उठा देंगी और फिर इसके नीचे से समुद्री जहाज निकल सकेंगे।

नए और पुराने पमबन ब्रिज में अंतर:

  • पुराना ब्रिज सिंगल लाइन का है जबकि नए पम्बन ब्रिज में डबल रेलवे ट्रैक बिछाया जा रहा है।
  • पुराने ब्रिज में 147 पिलर हैं जबकि नया ब्रिज 101 पिलर्स पर बनाया गया है।
  • नए ब्रिज में पिलर की गहराई 35 मीटर है।
  • पुराने ब्रिज का स्पेशल स्पैन 68 मीटर का है जबकि नए ब्रिज का स्पेशल स्पैन 72.5 मीटर का होगा।पुराने ब्रिज में
  • एक सामान्य स्पैन 12 मीटर का है यानी दो पिलर की दूरी 12 मीटर की है जबकि नए ब्रिज में ये दूरी 18 मीटर की रखी गई है।

निष्कर्ष:

नया पमबन ब्रिज भारत के इंजीनियरिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह देश के सबसे लंबे और सबसे आधुनिक रेलवे पुलों में से एक होगा। यह पुल रामेश्वरम के लोगों के लिए आवागमन को आसान बनाएगा और पर्यटन को बढ़ावा देगा।

Bandra worli sea-link
Bandra worli sea-link-1 (Image credit to dainik Bhashkar)

Bandra worli Sea Link: यह भारत का पहला 8 लेन और समुद्री ब्रिज है, जिसने मुंबई के बांद्रा और वरली क्षेत्रों को एक नए संबंध के साथ जोड़ा।

भारत के दिल में बसी मुंबई ने एक ऐतिहासिक क्षण को अपने आंचल में जगह दिया था, जब बांद्रा-वरली सी लिंक ने 5.6 किलोमीटर लंबे समुद्री सफर को मात्र 10 मिनट में पूरा कर दिया। इस आधुनिक संबंध सेतु ने 2009 में आज ही के दिन लोगों को नए और तेजी से जुड़ने का मौका प्रदान किया। इस ब्रिज का वजन 56,000 अफ्रीकन हाथियों के वजन के बराबर है, जिसमें 90,000 टन सीमेंट का इस्तेमाल हुआ था।

Bandra Worli sea link: विशेष विशेषताएँ

  • लंबाई:
    बांद्रा-वरली सी लिंक, जिसे राजीव गांधी सी लिंक भी कहा जाता है, भारत का सबसे लंबा समुद्री ब्रिज है। इसकी लंबाई 5.6 किलोमीटर है, जिससे यह अद्वितीयता में भारतीय संबंधों का प्रतीक बना है।
  • लेनों की संख्या:
    यह सी लिंक भारत का पहला 8 लेन वाला समुद्री ब्रिज है, जिससे यात्रा में तेजी, सुरक्षा और सुविधा का संबंधित होना सुनिश्चित है।
  • कुल लागत:
    इस महापरियोजना की शुरुआत में 600 करोड़ आंकी गयी थी। जो आगे बढ़कर निर्माण पूरा होने तक कुल लागत 1600 करोड़ रुपए हो गयी थी, जो कि इसके शानदार और आधुनिक डिज़ाइन को तौलती है।
  • सुंदरता और डिज़ाइन:
    ब्रिज की डिज़ाइन और सुंदरता ने इसे मुंबई के स्काइलाइन में एक नया चेहरा प्रदान किया है। रात में ब्रिज की लाइटिंग ने इसे एक रूपयात्रा का हिस्सा बना दिया है।
  • यात्रा की सुविधा:
    बांद्रा-वरली सी लिंक ने मुंबई और नवी मुंबई के बीच यात्रा को तेजी, सुरक्षित और आराम से करने का मौका दिया है। यह आबादी के बढ़ते दबाव को ध्यान में रखते हुए एक महत्वपूर्ण सुविधा प्रदान करता है।
  • पर्यावरणीय पहलू:
    इस प्रोजेक्ट के दौरान पर्यावरण की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए कई पहलूओं का ख्याल रखा गया, जिससे प्रदूषण कम हो, और समुद्री जीवन को किसी भी हानि से बचाया जा सके।

4. वाशी ब्रिज: Fourth Entry Marg in Mumbai

 

longest sea bridge in india
Washi bridge (Image credit to TOI)

वाशी ब्रिज का निर्माण 1989 में शुरू हुआ और 1997 में पूरा हुआ।इस ब्रिज का कुल निर्माण खर्च लगभग 37.84 करोड़ रुपए था, जो कि उस समय के लिए एक महत्वपूर्ण निर्माण परियोजना था।इस पुल का निर्माण भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने किया।वाशी ब्रिज, जिसे थाणे क्रीक ब्रिज भी कहा जाता है, मुंबई में स्थित है

वाशी ब्रिज एक कांक्रीट-प्रबलित कंक्रीट (RCC) पुल है। यह एक सेतु-पुल है, जिसका अर्थ है कि यह एक पुल और एक सेतु का संयोजन है। पुल के मध्य भाग में एक सेतु है, जो थाणे खाड़ी को पार करता है। पुल के दोनों ओर के हिस्से में पुल हैं, जो वाशी और महालक्ष्मी को जोड़ते हैं।

वाशी ब्रिज पर चार लेन हैं, जिनमें से प्रत्येक लेन 12 मीटर चौड़ी है। पुल पर 14 मीटर ऊंचे 16 पिलर हैं। पुल के बीच का सेतु 1.2 किलोमीटर लंबा है। बैसे पल की कुल लम्बाई 2.5 Km है।

वाशी ब्रिज की विशेषताएं

  • लंबाई: 2.5 किलोमीटर
  • लेन की संख्या: चार
  • कुल लागत: 37.84 करोड़ रुपये
  • निर्माण का समय: 1989 से 1997 तक

वाशी ब्रिज का महत्व

वाशी ब्रिज मुंबई और नवी मुंबई को जोड़ने वाला एक महत्वपूर्ण पुल है। यह मुंबई में प्रवेश करने का चौथा मार्ग है। इस पुल के बनने से पहले, मुंबई और नवी मुंबई के बीच आवागमन केवल दो पुल, बांद्रा-वर्ली सी लिंक और महात्मा गांधी रोड ब्रिज से ही हो सकता था। वाशी ब्रिज के बनने से इन दोनों पुलों पर यातायात का दबाव कम हुआ है।

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